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Names of Speakers

Names of Speakers

अशोक वाजपेयी

पिछले पचास वर्षों से सर्जनरत कवि, आलोचक, कलाविद् तथा संस्कृतिकर्मी अशोक वाजपेयी अपनी पीढ़ी के सम्भवतः सबसे सक्रिय लेखक हैं। आपके अब तक पन्द्रह कविता-संग्रह, पाँच आलोचना पुस्तकें, आत्मवृत्तान्त गद्य की एक किताब तथा चित्रकार सैयद हैदर रज़ा के जीवन और कला पर आधारित हिन्दी तथा अंग्रेज़ी में महत्त्वपूर्ण पुस्तकें प्रकाशित हैं। कविताओं के अनेक भारतीय भाषाओं में अनुवाद के अतिरिक्त अंग्रेज़ी, पोलिश एवं फ्रेंच में भी अनुवाद प्रकाशित हैं। साहित्य अकादेमी पुरस्कार, दयावती मोदी कवि शिखर सम्मान, कबीर सम्मान के अलावा फ्रेंच सरकार का ‘ऑफ़िसर ऑव द ऑर्डर ऑव आर्टस एण्ड लैटर्स’ तथा पोलिश सरकार का ‘ऑफ़िसर ऑव द ऑर्डर ऑव क्रास’ से सम्मानित हैं।

असग़र वजाहत

प्रख्यात हिन्दी विद्वान, लेखक, साहित्यकार, नाटककार, पटकथा लेखक और स्वतन्त्र फ़िल्म निर्माता। सात आसमान; जिस लाहौर नहीं देख्या, वो जम्या नहीं जैसी कृतियों के लिए ख्यातिप्राप्त। पाँच उपन्यास, पाँच कहानी-संग्रह, छः नाटकों सहित बीसियों पुस्तकें प्रकाशित। कई देशी-विदेशी भाषाओं में अनूदित। फ़िल्मों के लिए पटकथा लेखन। वर्षों तक जामिया मिल्लिया इस्लामिया में हिन्दी का अध्यापन। आउटलुक हिन्दी द्वारा वर्ष 2007 में करा ये गये सर्वे के मुताबिक दस सर्वाधिक लोकप्रिय हिन्दी लेखकों में एक नाम।

अनंत विजय

अनंत विजय साहित्य और पत्रकारिता के मध्य एक मजबूत कड़ी के रूप में जाने जाते हैं| प्रिंट और इलेक्ट्रोनिक मीडिया के क्षेत्र में व्यापक अनुभव रखने वाले श्री विजय वर्तमान में प्रतिष्ठित आईबीएन 7 में बतौर कार्यकारी प्रोड्यूसर कार्यरत हैं|आप विभिन्न राष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में नियमित रूप से स्तम्भ-लेखन करते रहे हैं| प्रकाशित पुस्तकों में प्रसंगवश, कोलाहल कलह में, मेरे पात्र और विधाओं का विन्यास प्रमुख हैं। आपके लेखन से पाठकों के सामने एक नयी दुनिया खुलती है जो बेहद आह्लादक होती है और प्रेरणादायी भी।

यतीन्द्र मिश्र

यतीन्द्र मिश्र प्रख्यात युवा कवि व साहित्यकार हैं। अब तक आपके चार कविता संग्रह यदा कदा, अयोध्या तथा अन्य कविताएँ, ड्योढ़ी पर आलाप और विभास तथा इसके अतिरिक्त शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी के जीवन और संगीत-साधना पर आधारित गिरिजा, मशहूर नृत्यांगना सोनल मानसिंह से साक्षात्कार पर आधारित देवप्रिया और उस्ताद बिस्मिल्लाह खां पर सुरों की बारादरी नामक कृतियाँ प्रकाशित हो चुकी हैं। बहुमुखी और विलक्षण प्रतिभा के धनी यतीन्द्र न केवल एक संवेदनशील कवि और लेखक हैं अपितु एक सूक्ष्मदर्शी सम्पादक, उत्कृष्ट अनुवादक, आत्मीय कला समीक्षक, सरोकारी संस्कृतिकर्मी और गहरे संगीत अध्येता भी हैं। आपकी अनवरत साहित्यिक सेवा के लिए भारत भूषण कविता सम्मान, हेमंत स्मृति कविता पुरस्कार, ऋतुराज सम्मान, रज़ा पुरस्कार और शोधवृत्तियाँ भी प्राप्त हैं। साहित्य, संगीत एवं अन्य ललित कलाओं के साथ-साथ समाज और संस्कृति के विविध क्षेत्रों में आपकी गहरी अभिरुचि प्रशंसनीय एवं अनुकरणीय है।

अभय कुमार दुबे

अभय कुमार दुबे एक सामाजिक विद्वान, अनुवादक और सम्पादक हैं| श्री दुबे सी.एस.डी.एस. में ‘भारतीय भाषा कार्यक्रम’ के निदेशक हैं | 1990 के दशक में प्रकाशित आपकी कृति क्रांति का आत्मसंघर्ष : नक्सलवादी आन्दोलन के बदलते चेहरे का अध्ययन को बेस्टसेलर बुक बनने का गौरव प्राप्त है तथा कई बार इस कृति का पुनःप्रकाशन किया जा चुका है | समाज-विज्ञान को हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में लाने की परियोजना के तहत पन्द्रह ग्रन्थों का सम्पादन और प्रस्तुति। वर्तमान में आप सामाजिक विज्ञान और मानविकी के छह खंडों के हिन्दी विश्वकोश का संकलन कर रहे हैं |

तरुण विजय

आप भारतीय राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत पत्रकार एवं चिन्तक हैं। सम्प्रति आप श्यामाप्रसाद मुखर्जी शोध संस्थान के अध्यक्ष हैं। आप 1986 से 2008 तक करीब 22 सालों तक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुखपत्र पाञ्चजन्य के सम्पादक रहे। फिलहाल आप डॉ॰ श्यामाप्रसाद मुखर्जी रिसर्च फाउंडेशन के निदेशक के पद पर हैं। आपने अपने कैरियर की शुरूआत ब्लिट्ज़ अखबार से की थी। बाद में कुछ सालों तक फ्रीलांसिंग करने के बाद आप आरएसएस से जुड़े और उसके प्रचारक के तौर पर दादरा और नगर हवेली में आदिवासियों के बीच काम किया। तरुण विजय शौकिया फोटोग्राफर भी हैं और हिमालय उन्हें बहुत लुभाता है।

मालिनी अवस्थी

भोजपुरी, अवधी, बुन्देलखंडी और हिन्दी की चर्चित लोकगायिका मालिनी अवस्थी एक जाना-माना नाम है। आप लखनऊ विश्वविद्यालय से हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत में स्नातकोत्तर हैं। आपने एनडीटीवी की कल्पना पर 'जुनून', महुआ टीवी और बिग मैजिक, गंगा भोजपुरी टीवी चैनलों पर भी शिरकत की है| आपको सहारा अवध सम्मान 2003 और पद्मश्री से नवाज़ा गया है |

अनुषा रिज़वी

आप पटकथा लेखक एवं फ़िल्म निर्देशक हैं। फ़िल्म जगत में आने से पहले आप एक प्रख्यात पत्रकार थीं। बतौर निर्देशक आपकी पहली फ़िल्म 'पीपली लाइव' को काफ़ी सराहना मिली और डरबन फ़िल्म महोत्सव में सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म का ख़िताब मिलना और गोल्लापुडी श्रीनिवास पुरस्कार प्राप्त करना आपकी सफलता को बयां करता है।

अदिति माहेश्वरी-गोयल

आप अंग्रेज़ी साहित्य में परास्नातक हैं। आपने स्ट्रेथक्लाइड बिजनेस स्कूल, स्कॉटलैंड से बिजनेस मैनेजमेंट तथा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस, मुम्बई से प्री-डॉक्टरल/एम.फिल. की डिग्री प्राप्त की है। आप वाणी प्रकाशन में कॉपीराइट और अनुवाद की प्रमुख तथा वाणी फाउंडेशन की प्रबन्ध न्यासी हैं।

मीनाक्षी ठाकुर

आप हार्पर कॉलिंस हिन्दी की प्रकाशक हैं। आप एक कवयित्री एवं लेखिका हैं। आपने अभी तक हिन्दी कविताओं के दो संग्रह प्रकाशित करवाए हैं जिनके नाम हैं जब उठी यवनिका और नींद का आखरी पुल। आप साहित्य अकादेमी युवा पुरस्कार 2012 के लिए भी नामांकित की गयी थीं। 2012 में ही आपको संगम हाउस फ़ेलोशिप से भी नवाज़ा गया है।

मनीषा पाण्डेय

पेशे से पत्रकार, राइटर, ब्लॉगर, फेसबुक पर स्त्रियों की उभरती हुई सशक्त आवाज हैं, लेकिन इन सबसे ज्यादा और सबसे पहले वह एक आज़ाद, बेख़ौफ़ सपने देखने वाली स्त्री हैं। रोजी-रोटी के लिए पत्रकारिता करती हैं, लेकिन बाकी वक्त ख़ूब किताबें पढ़ती हैं, घूमती हैं, फ़ोटोग्राफ़ी करती हैं। आपकी ज़िन्दगी अकेली और स्वतन्त्र महिला का सफ़र है, जिसने इलाहाबाद, मुम्बई और दिल्ली समेत देश के कई शहरों की ख़ाक छानी है। मनीषा पूरी दुनिया की सैर करना चाहती हैं। मनीषा का परिचय इन दो शब्दों के इर्द-गिर्द घूमता है- आज़ाद, घुमक्कड़ी और बेख़ौफ़ लेखन।

केदारनाथ सिंह

आप हिन्दी के सुप्रसिद्ध साहित्यकार एवं अज्ञेय द्वारा सम्पादित तीसरा सप्तक के कवि हैं। आप 2013 में ज्ञानपीठ पुरस्कार पाने वाले हिन्दी के 10वें लेखक हैं। आपको मैथिलीशरण गुप्त सम्मान, कुमारन आशान पुरस्कार, जीवन भारती पुरस्कार, दिनकर पुरस्कार, साहित्य अकादेमी पुरस्कार, व्यास सम्मान आदि पुरस्कार प्राप्त हुए हैं। आपकी मुख्य कृतियों में अभी बिल्कुल अभी, यहाँ से देखो, अकाल में सारस आदि शामिल हैं। आप जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केन्द्र में बतौर आचार्य और अध्यक्ष भी रह चुके हैं।

लीलाधर मंडलोई

आप एक प्रख्यात हिन्दी कवि हैं। आप 28 साल तक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से भी जुड़े रहे हैं। आपके प्रमुख कविता संग्रह हैं–घर-घर घूमा, रात-बिरात, देखा-अनदेखा, मगर एक आवाज़, आदि। आपने अंडमान-निकोबार द्वीपों के बारे में 2 भागों में लोक-कथाएँ भी लिखी हैं जिनके शीर्षक हैं–‘अंडमान-निकोबार की लोक-कथाएँ’। आप देश के अग्रणी अख़बारों और पत्रिकाओं में मीडिया और साहित्यिक मुद्दों पर लिखते रहते हैं। आप एक निपुण पटकथा लेखक के रूप में भी प्रसिद्ध हैं। आपको वागेश्वरी पुरस्कार, रामविलास शर्मा पुरस्कार, रज़ा पुरस्कार, प्राचीन कला केन्द्र पुरस्कार आदि से सम्मानित किया गया है।

मदन कश्यप

आपका जन्म बिहार के वैशाली जनपद में हुआ है। कविता लेखन के अलावा आपकी वैचारिक लेखन और जनान्दोलनों में सक्रिय भागीदारी रही है। आपकी प्रकाशित कृतियों में शामिल हैं–लेकिन उदास है पृथ्वी, नीम रोशनी (कविता), मतभेद, लहूलुहान लोकतन्त्र (आलेख)।

शीन काफ़ निज़ाम

26 नवम्बर, 1945 को जोधपुर में पैदा हुए शीन काफ़ निज़ाम ने शाइरी के साथ-साथ आलोचना, शोध और सम्पादन में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। जिसके लिए उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार, राष्ट्रीय इक़बाल सम्मान, भारतीय भाषा संस्थान द्वारा भाषा-भारती सम्मान, बेगम अख़्तर ग़ज़ल सम्मान तथा राजस्थान उर्दू अकादेमी का सर्वोच्च ‘महमूद शीरानी सम्मान’ से सम्मानित किया गया।

प्रभात रंजन

3 नवम्बर, 1970, सीतामढ़ी, बिहार में जन्मे प्रभात रंजन की लेखन विधाएँ कहानी एवं आलोचना हैं। आपकी प्रमुख कृतियाँ जानकीपुल, बोलेरो क्लास (कहानी संग्रह); पत्रकारिता के युग निर्माता : मनोहर श्याम जोशी, मार्केज़ : जादुई यथार्थ का जादूगर (आलोचना); एन फ्रैंक की डायरी, श्रीनगर का षड्यन्त्र सहित 18 पुस्तकों के अनुवाद प्रकाशित। आपका राही मासूम रज़ा के प्रसिद्ध धारावाहिक ‘नीम का पेड़’ का उपन्यास रूपान्तरण भी प्रकाशित हुआ है । जानकीपुल.कॉम ब्लॉग के साथ-साथ आपने बहुवचन के छह अंकों का सम्पादन भी किया है । सम्मान: प्रेमचन्द सम्मान, सहारा समय कथा सम्मान, कृष्ण बलदेव वैद फेलोशिप, एबीपी न्यूज सर्वश्रेष्ठ ब्लॉगर सम्मान।

सुधीश पचौरी

मार्क्सवादी समीक्षक, प्रख्यात स्तम्भकार, मीडिया विशेषज्ञ एवं दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रो-वाइस चांसलर सुधीश पचौरी का जन्म 29 दिसम्बर, जनपद अलीगढ़ में हुआ ।आपकी चर्चित पुस्तकें हैं--नयी कविता का वैचारिक आधार; कविता का अन्त; दूरदर्शन की भूमिका; दूरदर्शनः स्वायत्तता स्वतन्त्रता (सं.); उत्तर-आधुनिक परिदृश्य; उत्तर-आधुनिकता और उत्तर संरचनावाद; नवसाम्राज्यवाद और संस्कृति; नामवर के विमर्श (सं.); उत्तर-आधुनिक साहित्य विमर्श; दूरदर्शनः विकास से बाज़ार तक; उत्तर-आधुनिक साहित्यिक-विमर्श; देरिदा का विखण्डन और विखण्डन में ‘कामायनी’; मीडिया और साहित्य; टीवी टाइम्स; साहित्य का उत्तरकाण्ड; अशोक वाजपेयी पाठ कुपाठ (सं.); प्रसार भारती और प्रसारण-परिदृश्य; दूरदर्शनः सम्प्रेषण और संस्कृति, स्त्री देह के विमर्श; आलोचना से आगे; मीडिया, जनतन्त्र और आतंकवाद; निर्मल वर्मा और उत्तर-उपनिवेशवाद; विभक्ति और विखण्डन; हिन्दुत्व और उत्तर-आधुनिकता; मीडिया की परख; पॉपूलर कल्चर; भूमण्डलीकरण, बाज़ार और हिन्दी; टेलीविजन समीक्षाः सिद्धान्त और व्यवहार; उत्तर-आधुनिक मीडिया विमर्श; विंदास बाबू की डायरी; फासीवादी संस्कृति और पॉप-संस्कृति।
सम्मानः मध्यप्रदेश साहित्य परिषद् का रामचन्द्र शुक्ल सम्मान (देरिदा का विखण्डन और विखण्डन में ‘कामायनी’); भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार से सम्मानित; दिल्ली हिन्दी अकादमी द्वारा ‘साहित्यकार’ का सम्मान।

देवेन्द्र राज अंकुर

दिल्ली विश्वविद्यालय से हिन्दी साहित्य में एम.ए.। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से निर्देशन में विशेषज्ञता के साथ नाट्य-कला में डिप्लोमा। बाल भवन, नयी दिल्ली के वरिष्ठ नाट्य-प्रशिक्षक। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय रंगमंडल के सदस्य। भारतेन्दु नाट्य अकादमी, लखनऊ में नाट्य-साहित्य, रंग स्थापत्य और निर्देशन के अतिथि विशेषज्ञ। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में भारतीय शास्त्रीय नाटक और सौन्दर्यशास्त्र के सहायक प्राध्यापक। राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय द्वारा विभिन्न शहरों में संचालित गहन रंगमंच कार्यशालाओं में विशेषज्ञ, निर्देशक तथा शिविर और कार्यशाला निर्देशक के रूप में सम्बद्ध। देश के विभिन्न रंगमंच संस्थानों और विश्वविद्यालयों में अतिथि परीक्षक। प्रकाशित कृतियाँ: ये आदमी ये चूहे, मीडिया, चाणक्य प्रपंच, पहला रंग, रंग कोलाज, दर्शन-प्रदर्शन, अन्तरंग बहिरंग, रंगमंच का सौन्दर्यशास्त्र और पढ़ते, सुनते, देखते, दूसरे नाट्यशास्त्र की खोज।

अनामिका

दिल्ली विश्वविद्यालय में अंग्रेज़ी पढ़ाती और कई छोटी-बड़ी, देशी-विदेशी गोष्ठियों में विश्व-साहित्य के अन्तःपाठीय पक्षों पर बोलते हुए अनामिका ने अपने छह चर्चित उपन्यासों और सात पुरस्कृत काव्य-संकलनों में ‘बिना दीवारों के घर’ की नयी दृष्टि विकसित की है और ढेर सारे महत्त्वपूर्ण अनुवाद भी किए हैं! वाणी प्रकाशन से प्रकाशित पुस्तकें: तिनका तिनके पास (उपन्यास), नयी सदी के लिए चयन: पचास कविताएँ (कविता संग्रह), स्त्री-विमर्श का लोकपक्ष (स्त्री-विमर्श)।

स्मिता परिख

आकाशवाणी में उद्घोषिका, अभिनेत्री, और एबिज़्ज़ एंटरटेनमेंट की मुख्य प्रबन्धक स्मिता परिख बचपन से ही कविताएँ और कहानियाँ लिखने की शौकीन हैं। स्मिता को कक्षा 11वीं में मात्र 15 वर्ष की उम्र में राजस्थान साहित्य अकादेमी से कहानी लेखन के लिए युवा साहित्यकार पुरस्कार प्राप्त हुआ, उसी साल महाराणा मेवाड़ फाउंडेशन से कविता लेखन के लिए, पुरस्कार प्रदान किया गया। आकाशवाणी उदयपुर और फिर आकाशवाणी मुम्बई से जुड़ाव रहा और स्मिता ने एफएम चैनल पर कई सफल कार्यक्रमों का संचालन किया, ‘अपने मेरे अपने’ और ‘जाएँ कहाँ’ जैसे प्रसिद्ध टेलीविजन कार्यक्रमों में मुख्य भूमिकाएँ निभायीं। दूरदर्शन के नेशनल चैनल पर कई सफल कार्यक्रमों जैसे--‘बायस्कोप’, ‘सिने सतरंगी’, ‘डीडी टॉप 10’ का संचालन किया।
मुम्बई में आपकी एबिज़्ज़ एंटरटेनमेंट के नाम से एक कम्पनी है जो देश-विदेश में इवेंट्स करती है। मुम्बई का प्रसिद्ध साहित्यिक सम्मेलन 'लिट्-ओ-फेस्टिवल' मुम्बई का सम्पूर्ण निर्देशन स्मिता करती हैं। आप इस महोत्सव की प्रबन्धक हैं। देश-भर से इस सम्मेलन में नामी साहित्यकार हिस्सा लेते हैं। हिन्दी भाषा को अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर लाने का ये एक अभियान है। आपके मैं पन्थ निहारूँ... और नज़्में इन्तज़ार की... दो कविता संग्रह प्रकाशित हुए हैं।

ऋचा अनिरुद्ध

31 मई , 1975 में जन्मी ऋचा अनिरुद्ध ने अपने कैरियर की शुरुआत दूरदर्शन से की। सामाजिक सरोकार से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ आईबीएन7 हिन्दी समाचार चैनल से भी सम्बद्ध रही हैं।

सुधन्वा देशपांडे

सुधन्वा देशपांडे मुख्यतः अभिनेता तथा निर्देशक हैं और 1987 से जन नाट्य मंच के सदस्य हैं। नुक्कड़ नाटक की आरम्भिक ट्रेनिंग आपको सफ़दर हाशमी से मिली, और कई वर्षों तक आप हबीब तनवीर और नया थिएटर से भी अलग-अलग तरह से जुडे रहे। नया थिएटर पर आपने दो फिल्में सह-निर्देशित की हैं। सुधन्वा व्यवसाय से प्रकाशक हैं, और लेफ्टवर्ड बुक्स का काम देखते हैं।

सुरेन्द्र मोहन पाठक

सुरेन्द्र मोहन पाठक सस्पेंस और थ्रिलर का मायावी संसार रचने वाले वह लेखक हैं जिनकी कोई भी किताब 40,000 से कम नहीं छपती और विमल सीरीज की उनकी 42 किताबें लगभग एक करोड़ से ज्यादा बिक चुकी हैं। आपका जन्म 19 फ़रवरी 1940 को खेमकरण, अमृतसर, पंजाब में हुआ था। विज्ञान में स्नातक की उपाधि लेने के पश्चात आपने भारतीय दूरभाष उद्योग में नौकरी की। आप बचपन से ही पढने के शौक़ीन हैं। सन 1959 में, आपकी प्रथम कहानी '75 साल पुराना आदमी' मनोहर कहानियाँ नामक पत्रिका में प्रकाशित हुई। सन 1969 में आपका पहला पूर्ण उपन्यास 'ऑपरेशन बुडापेस्ट' आया। 'ऑपरेशन बुडापेस्ट' आपके द्वारा रचित 30वीं कृति थी। आपका पहला उपन्यास 'पुराने गुनाह नये गुनहगार', सन 1963 में 'नीलम जासूस' नामक पत्रिका में छपा था। सन 1963 से सन 1969 तक विभिन्न पत्रिकाओं में आपके उपन्यास छपते रहे।
सुरेन्द्र मोहन पाठक का सबसे प्रसिद्ध उपन्यास 'असफल अभियान' और 'खाली वार' था जिसने पाठक जी को प्रसिद्धि के सबसे ऊँचे शिखर पर पहुँचा दिया। इसके पश्चात आपने अभी तक पीछे मुड़ कर नहीं देखा है। 'पैंसठ लाख की डकैती' नामक उपन्यास का अंग्रेजी में अनुवाद भी प्रकाशित हुआ तथा यह खबर टाइम मैगज़ीन में भी प्रकाशित हुई थी। यह भी चर्चा का विषय रहा कि इस उपन्यास की लगभग ढाई करोड़ प्रतियाँ बिकी थीं।

रागिनी नायक

रागिनी नायक ने दिल्ली विश्वविद्यालय से लॉ की पढाई की है। आप छात्र संघ राजनीति में भी काफी सक्रिय रही हैं। आप राजनितिक प्रवक्ता भी हैं|

संजीव पालीवाल

अपने कैरियर की शुरुआत बीआईटीवी से करने वाले संजीव पालीवाल एक प्रख्यात पत्रकार हैं व आप 20 साल से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं| आप डीडी न्यूज़, आज तक एवं नेटवर्क 18 में भी काम कर चुके हैं|

आर.जे. रौनक

आप एक रेडियो जॉकी हैं और 93.5 रेडियो एफएम के साथ जुड़े हुए हैं| आप दिल्लीवालों को अपने एक अलग अन्दाज़ में गुदगुदाते हैं| 'बउआ' के रूप में मशहूर आर.जे. रौनक रेडियो में सबसे लोकप्रिय किरदार बन चुके हैं|

उज्ज्वल नागर

उज्ज्वल नागर पारम्परिक रागों के बारे में गहरा ज्ञान, अपने उत्कृष्ट तबला कौशल, और मूल संगीत शैलियों के लिए जाने जाते हैं। अपनी माँ, प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना और गायक, गुरु उर्मिला नागर से प्रेरित होकर, वैश्विक उपस्थिति के साथ एक शुद्ध शास्त्रीय गायक के प्रमुख उदाहरण हैं।

अनु सिंह चौधरी

‘गांव कनेक्शन’ नाम के एक ग्रामीण अखबार की कन्सल्टिंग एडिटर हैं. वह रेडियो के लिए भी कहानियां लिखती हैं और अब उपन्यास लिखने की तैयारी कर रही हैं. साथ ही वह हार्पर कॉलिन्स (हिंदी) की कन्सल्टिंग एडिटर भी हैं.

सौरभ द्विवेदी

सौरभ द्विवेदी. वल्द श्री रविकांत और श्रीमती मधु प्रभा द्विवेदी. पत्नी का नाम श्रीमती गुंजन सांगवान. स्थायी पता. ग्राम पोस्ट चमारी. जनपद जालौन, उत्तर प्रदेश. हाल मुकाम नोएडा. नजदीकी पुलिस चौकी परथला खंजरपुर, नोएडा उम्र 32 साल 10 महीना. कद 5 फुट 10 इंच. रंग गेंहुआ. बालों का रंग काला. आंखों का रंग भूरा. पहचान. ठोड़ी पर कटे का निशान. गाल में डिंपल. नो पिंपल. गोदना कोई नहीं. गुमशुदा हैं. खुद ही. खुद ही तलाश रहे हैं. गौर करिएगा. गमजदा नहीं हैं. असुविधा देते लेते नहीं. इसलिए खेद को खदेड़ रखा है. दुनिया में तीन शहर हैं. मुंबई, दुबई और उरई. ये दुबे उरई से है. भकुआया हुआ सा आदमी. फिल्म देखता है तो खुद हीरो बन जाता है. खुरदुरेपन का आशिक. भाषा और सभ्यता के लिहाफ और हर तरह की चिकनाहट से परहेज. बड़े होकर किसान बनेगा. किस्से बोएगा. फिलहाल उखाड़ रहा है, सियासत, सिनेमा और समाज के कहे-पढ़े किस्से. दी लल्लनटॉप वेबसाइट के सरपंच. 'सौरभ से सवाल' कॉलम का धरता कर्ता. छकड़ी (ताश का गेम) और गाने वाली कविता के लिए पूरी रात जाग सकता है. लूडो में बेमंटी बर्दाश्त नहीं.

स्वाति अर्जुन

पिछले 14 सालों से हिंदी और अंग्रेज़ी पत्रकारिता में सक्रिय. मैंने सहारा समय से करियर की शुरुआत की फिर बीबीसी हिंदी, हेडलाइंस टुडे और एनडीटीवी में काम किया. इलेक्ट्रोनिक मीडियम की सभी तीन विधाओं टेलीविज़न, रेडियो और ऑनलाइन में काम कर चुकी हूं. इस दौरान साहित्य और कविता से जुड़ी रिपोर्ट्स पर ख़ासतौर काम किया है. कई न्यूज़ वेबसाइट्स के लिए ब्लॉग लिखती रही हूं. स्वतंत्र रूप से अनुवाद का काम करती रही हूं, कई डॉक्युमेंट्री और कॉरपोरेट फिल्मों के आवाज़ दी है. हिंदी साहित्य और कविता में ग़हरी रूचि रखती हूं. कविता से विशेष लगाव, जब भी मन विकल होता तब कविताओं के ज़रिए अपनी भावनाओं को व्यक्त करने की कोशिश करती हूं. इस तरह अनियमित तौर पर हिंदी में कविताएं भी लिखती हूं.

अजित राय

देश के उन गिने-चुने साहित्यिक-सांस्कृतिक पत्रकारों में से एक हैं जिन्होंने पिछले 25 वर्षों में देश के लगभग सभी महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय अखबारों-पत्रिकाओं एवं रेडियो-टेलीविजन में साहित्य, रंगमंच, सिनेमा, संस्कृति के अन्य रूपों एवं बौद्धिक विषयों पर लगातार लेखन किया है। उनके हिंदी में अब तक प्रकाशित लगभग पाँच हजार आलेखों, रिपोर्ताजों, रपटों, समीक्षाओं, साक्षात्कारों एवं आवरण कथाओं में से अधिकतर देश की सांस्कृतिक पत्रकारिता में मील का पत्थर माने गए हैं। उनकी कई रपटों पर भारतीय संसद में सवाल पूछे गए एवं बहस हो चुकी हैं।अजित राय इस समय हिंदी के अकेले ऐसे पत्रकार हैं जिन्हें सच्चे अर्थों में अंतरराष्ट्रीय कहा जा सकता है। उन्होंने पिछले दस वर्षों में दुनिया भर में हो रही साहित्य, संस्कृति, रंगमंच और सिनेमा की तमाम महत्त्वपूर्ण गतिविधियों की अपनी रिपोर्टिंग से हिंदी संसार को परिचित कराया।

पंकज दुबे

(जन्म 28 जुलाई 1978) एक भारतीय लेखक है, पटकथा लेखक , निर्देशक और निर्माता से मुंबई । वह एक है विधि स्नातक की डिग्री से दिल्ली विश्वविद्यालय और एप्लाइड से संचार में परास्नातक की कला और डिजाइन के कोवेन्ट्री स्कूल । दुबे के लिए काम किया है बीबीसी वर्ल्ड सर्विस लंदन में और नई दिल्ली में टीवी टुडे समूह। उन्होंने क्यूरेट और भारत भर में 50 से अधिक फिल्म समारोहों प्रोग्राम किया गया है। एक सलाहकार के रूप में कैपजेमिनी के साथ कार्य करना। उन्होंने कहा कि मलिन बस्तियों और गांवों, सड़क फिल्म महोत्सव में बच्चों के लिए भारत की पहली सड़क फिल्म महोत्सव की शुरुआत के लिए 2010 में गुलबर्गा में सामाजिक उद्यमिता के लिए यूथ आइकन अवार्ड, कर्नाटक के साथ सम्मानित किया गया। दुबे की पहली उपन्यास क्या एक हारे हुए कहा जाता है! अंग्रेजी और हारे हुए में कहीं का! हिंदी में। उन्होंने एक फीचर फिल्म, हारे हुए कहीं का निर्देशन कर रहीहै!, उनके उपन्यास से अनुकूलित।

संस्थापक न्यासी / Founder Trustee

अशोक वाजपेयी / Ashok Vajpeyi

Ashok Vajpeyi is an Indian poet in Hindi, essayist, literary-cultural critic

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  • Gulzar Saheb is an eminent figure of the Indian literature and film industry. He is well known as a lyricist, author, filmmaker, dialogue-writer, poet and translator.Gulzar

  • Yatindra Mishra is a celebrated poet, writer, who has poetry collections like Agyeya: Jitna Tumhara Sach Hai and Ayodhya Tatha Anya Kavitayein to his name. Yatindra Mishra

  • Anant Vijay is a known name in literature and journalism. He is currently serving as the executive producer at IBN7 News Network and has a vast and varied experience in the field of print and electronic media. Anant Vijay