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प्रेरणा / Inspiration

प्रेमचन्द्र 'महेश' / Premchandra 'Mahesh'

वाणी प्रकाशन की नींव अध्यापक एवं लेखक श्री प्रेमचन्द्र ‘महेश’ ने 1964 में रखी, हालाँकि विधिवत प्रकाशन एवं वितरण का काम 1968 से सम्भव हो सका। श्री प्रेमचन्द्र ‘महेश’ 19 वर्ष की उम्र में हापुड़ के एक इंटर कॉलेज में हिन्दी के अध्यापक बने। 22 वर्ष की उम्र में उनके उपन्यास ‘हर्षवर्द्धन’ को भारत सरकार द्वारा पुरस्कृत किया गया। उन्होंने अध्यापन, प्रकाशन, अंग्रेजी हटाओ आंदोलन के साथ-साथ हस्तलिखित ‘प्रगति’ पत्रिका ही नहीं निकाली बल्कि अपना रचनात्मक लेखन उपन्यास, कविता एवं शोध-परक लेखन भी जारी रखा। उनका निधन मात्र 42 वर्ष 10 दिन की अल्पायु में 2 जून 1978 को हुआ। मरणोपरांत मेरठ विश्वविद्यालय ने उनके शोध प्रबन्ध ‘हिन्दी रामकाव्य का स्वरूप एवं विकास’ पर उन्हें पीएच.ड़ी की उपाधि प्रदान की। उन्होंने वाणी प्रकाशन की नींव रखते हुए ही यह तय किया कि हमारा उद्देश्य केवल कमाना ही नहीं होगा बल्कि सामाजिक दायित्व के साथ हम आगे बढ़ेंगे। इसी विचार के साथ हम ‘वाणी न्यास’ की स्थापना कर रहे हैं।

संस्थापक न्यासी / Founder Trustee

अशोक वाजपेयी / Ashok Vajpeyi

Ashok Vajpeyi is an Indian poet in Hindi, essayist, literary-cultural critic

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Testimonial

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